Thursday, December 16, 2010

        राह 


बहुत तेज़ दौड़ रही थी ज़िन्दगी
हुई ना थकान, ना कभी प्यास लगी
जिस राह पर रुक ना रही थी मेरी दौड़
उसी राह पर आज अपाहिज खड़ा हूँ मै!


सोचा था दिख रही है मंजिल
पाना है ना मुश्किल, बस लगा अपना दिल
जिस राह पर था मंजिल पाने का विश्वास
उसी राह पर आज गुमराह खड़ा हूँ मै!


उस राह को भरा था अपने सपनों से
राह के दोनों ओर सजाया था अपनों से 
जिस राह से जुडी थी मैंने अपनी पहचान
उसी राह पर आज अनजान खड़ा हूँ मै!


जिस राह पर दौड़ा, गिरा, डगमगाया
जिस राह ने मुझे कुछ मोड़ पर रुलाया
जिस राह पर बढते बढते भटक गया था मै
उसी राह पर आज नए विश्वास से खड़ा हूँ मै!

2 comments:

Anonymous said...

modalu english, eega hindi next yavdhu russian huh?
good going btw

SrInIdhI said...

Thanks:) I could have appreciated your comment more if I had known who this 'Anonymous' is... :)