Tuesday, February 3, 2009

नामों का रामायण - नामायण

परखा है क्या किसी ने नाम-काम की डोर

नाम से कुछ और तो काम से कुछ और

अक्ल-शक्ल कुछ और, कुछ और उनका मन

आगे पढिये तो सही, यही है नामों का रामायण|


नाम रखा भीम, उठा पाया ना पत्थर

चतुरकुमार
के अंक छः सौ में सिर्फ़ सत्तर

शेरसिंह
पर भौंक रहे गली के कुत्ते

मिलन
सिंह कभी किसी से ना मिलते|


दुल्हे राम की कभी ना निकली बारात

सूर्यकांत जागते रहे सारी सारी रात

श्रीमान परमानन्द हमेशा रहते रोते-रोते

भाग्यचंद का भाग्य दिखा सोते-सोते|


मजबूत सिंह के नल का हो रहा पानी लीक

धनीराम
दिखे रस्ते पर मांगते भीक

शान्ति
हमेशा दिखती आग की भाँती

पालन
कुमारी बड़ों की आज्ञा कभी ना मानती|


गंगाराम के घर का है बोरेवेल बंद

तेजकुमार का है गति अति मंद

ज्योति के घर में कभी ना दीप जला

शीघ्र्कुमार का सब काम टला|


यादराम को याद नही उसका नाम

है
बहुत सफ़ेद हमारे श्याम

विजयकुमार
दस बार एलेक्शन में हारे

अमरजी
बीस बरस में हुए भगवान के प्यारे|


छोटूलाल है जैसे अपने अमिताभ

लक्ष्मीकांत के व्यापार में कभी ना हुआ लाभ

गिरिधर अपना बैग कूली को दिया

शक्ति कपूर अपनी सारी शक्ति खो दिया|


इन लोगों का ही मै कर रहा था ज़िक्र

अपने
नाम और काम का रहे ना कोई फ़िक्र

नाम
के विपरीत निकले तन, मन और धन

इसलिए
लिखा मैंने नामों का रामायण - नामायण|

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