Friday, December 12, 2008

तमन्ना

लहलहाती चहचहाती आए बसंत

कली का जन्म, सूखे का अंत

हर ओर मुझे है समृद्धि परोसना

कहो बेटे क्या है तेरी तमन्ना?

हे बसंत! नव्य, निरंतर और अनंत

कर दो द्वेष, रक्त-पात का अंत

तेरी छाया में है नयापन पनपना

क्या पूरी करोगे मेरी तमन्ना?

स्वर्ण रथ सज्जित ग्रीष्म आए

सारा जग धुप में नहाए

हर ओर मुझे है धुप बिखरना

कहो बेटे, क्या है तेरी तमन्ना?

हे ग्रीष्म! ऋतू भीष्म तथा सहन

जग के रोगों का हो दहन

हर ओर उज्जवल प्रकाश है देखना

क्या पूरी करोगे मेरी तमन्ना?

कडकडाती गरजती आए वर्षा

दुखडे और प्यासे को है तराशा

हर प्राणी की है मुझे प्यास बुझाना

कहो बेटे, क्या है तेरी तमन्ना?

हे वर्षा! तू सबको है हर्षित करती

सूखे में हरियाली बरसाती

हर ओर मुझे प्रेम है सींचना

क्या पूरी करोगे, मेरी तमन्ना?

ऋतू श्रेष्ट शरद, शिशिर व हेमंत

हर जीवन का हो हर्ष अनंत

सिखानी है हर नन्हे को बंसी बजाना

क्या पूरी करोगे मेरी तमन्ना?

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